XXX Vale – Hindi XXX Stories For Adults

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संभोग कहानी आखिर ससुरजी घुस ही गए मेरी चुत में :- सूहास .. मेरी बुर में आग लगी है उसे अपने पानी से शांत कीजिए.. XXX Story

फ्री अश्लील XXX सेक्स कहानी हिंदी में आखिर ससुरजी घुस ही गए मेरी भोसड़ी में :- सूहास .. मेरी प्यासी फुद्दी में आग लगी है उसे अपने पानी से शांत कीजिए.. Free XXX Hindi Nonveg Sex Story For Adults 18+ Hindi Chudai Kahani : नमस्ते, मेरा नाम है सूहास. मैं बीस saal की हूँ दो साल से मेरी शादी प्रदीप से हुई है मेरी एक समस्या है जिस के बारे में मैं आप की राय माँग रही हूँ ये कहानी मेरी समस्या की है फेमिली में मैं मेरे स्मार्ट पति प्रदीप, मेरे ससुर जी रसिकलाल और मेरा छोटा सा बेटा किरण इतने हें. ससुर जी का बिझनेस बड़ा है और हमें खाने पीने की कोई कमी नहीं ह मेरे पिताजी का फेमिली बहुत ग़रीब था. चार बहनों में मैं सब से बड़ी संतान थी. मेरी मा लंबी बीमारी बाद मर गयी तब में सोलह साल की थी. मा के इलाज वास्ते पिताजी ने क्या कुछ नहीं किया, ढेर सारा कर्ज़ा हो गया. पिताजी रेवेंयू ओफ़िस में क्लेर्क क नौकरी करते थे, उन के पगार से मांड गुज़रा होता था. में छ्होटे मोटे काम कर लेती थी. आमदनी का ओर कोई साधन नहीं था जिस से कर्ज़ा चुका सकें. लेनदार लोग तक़ाज़ा कर रहे थे. फ़िक्र से पिताजी की सेहत भी बिगड़ ने लगी थी.ऐसे में मेरे संभावित ससुर रसिकलाल सहायता में आए. उन का एकलौता बेटा प्रदीप कंवारा था. दिमाग़ का थोड़ा सा बेकवार्ड हो ने से उसे कोई लड़की देता नहीं था. रसिकलाल की वाइफ भी छे महीनों पहले ही मर गयी थी, घर संभाल ने वाली कोई थी नहीं. उन्होंने जब करज़े के बदले में मेरा हाथ माँगा तब पिताजी ने तुरंत ना बोल दी. में हाई विद्यालय तक पढ़ी हुई थी, आगे कॉलेज में पढ़ने वाली थी. मेरे जैसी लड़की कैसे प्रदीप जैसे लड़के के साथ ज़िदगी गुज़ार सके ? मैने पिताजी से कहा : आप मेरी फिकर मत कीजिए, मेरी तीन बहनों की सोचिए. आप संबंध मंज़ूर कर दीजिए और सिर पर से करज़े का बोझ दूर कीजिए. में मेरी संभाल लूंगी.अपने हृदय पर पत्थर रख कर पिताजी ने मुज़े प्रदीप से ब्याह दी. तब में 18 साल की थी. में ससुराल आई. पहले ही दिन ससुरजी ने मुझे पास बीठा कर कहा : देख बेटी, में जानता हूँ की प्रदीप से शादी कर के तूने बड़ा बलिदान दिया है मेने तेरे पिताजी का कर्ज़ा भरावा दिया है किन्तु तूने जो किया है उस की क़ीमत पैसों में नहीं गीनी जाती. तूने तेरे पिताजी पर और मुझ पर भी बड़ा उपकार किया है में उत्तर मे कहने लगी : पिताजी…………उन्होंने मुज़े बोलने नहीं दिया. कहने लगे : पहले मेरी सुन ले. बाद में कहना जो चाहे सो. ठीक है ? अब तू मुज़ पर एक एहसान ओर कर दे. जल्दी से मुज़े एक पोता दे दे. समजी ? मुज़े बच्चा चाहिए. प्रदीप मेरा अकेला है थोड़ा सा बेकवार्ड है उस के साथ तुज़े सलूकाई से काम लेना होगा. मेने डाक्टर रवि की राई ली है उन का कहना था की प्रदीप जैसे लड़के नपुंसक होते हें और बाप नहीं बन सकते. किन्तु में ये मानने तैयार नहीं हूँ मेने क्या कहूँ तुझ से ? तू जो मेरी बेटी बराबर हो ? ख़ैर, माफ़ करना मुज़े साफ़ साफ़ बताना पड़ेगाउन्होंने नज़र फिरा ली. बोले : मैने उन का वो..वो देखा है टटार हुआ देखा है मुझे विश्वास है की वो तेरे साथ शारीरिक संबंध कर सकेगा और बच्चा पैदा कर सकेगा. मेरी ये विनती है की तू ज़रा इंतजार से काम लेना, जैसी ज़रूर पड़े वैसी उसे सहायता करना.ये सब सुन कर मुझे शरम आती थी. मेरा चहेरा लाल लाल हो गया था और में उन के सामने देख नहीं सकती थी. मेने कुछ कहा नहीं. वो आगे बोले : तुमारी सुहाग नाईट परसों है आज नहीं. में तुज़े एक किताब देता हूँ पढ़ लेना, सुहाग नाईट पर काम आएगी. और मुझ से शरमाना मत, में तेरे पिता जैसा ही हूँमुझ से नज़र चुराते हुए उन्होंने मुज़े किताब दी और चले गाये किताब काम शास्त्र की थी. मैने ऐसी किताब के बारे में सुना था किन्तु कभी देखी नहीं थी. किताब में चुदाई में लगे हुए कपल्स के फ़ोटो थे. मैं ख़ूब जानती थी की चुदाई क्या होती है लण्ड क्या है छूट क्या है सब. फिर भी फ़ोटो देख कर मुझे शरम आ गयी इन में से काई फ़ोटो ऐसे थे की जिस के बारे में मैने कभी सोचा तक ना था. एक फ़ोटो में महिला ने लण्ड मुँह में लिया था, छी छी इतना गंदा ? दूसरे में वही महिला की भोस आदमी चाट रहा था. एक में आदमी का पूरा लण्ड महिला की गांड में घुसा हुआ दिखाया था. कई फ़ोटो में एक महिला दो दो आदमी से चुदवाती दिखाई थी. ये देखने में में इतनी तल्लीन हो गयी थी की कब प्रदीप कमरे में आए वो मुज़े पता ना चला.आते ही उस ने पीछे से मेर आँखें पर हाथ रख दया और बोले : कौन हूँ में ? मेने उन की कलाइयाँ पकड़ ली और कहने लगी : छोड़िये कोई देख लेगा. मुज़े छोड़ कर वो सामने आए और बोले : क्या पढ़ती हो ? कहा नियाँ की किताब है ? अब मेरे लिए समस्या हो गयी की उन को चुदाई के फ़ोटू वाली किताब कैसे दिखा उन. किताब छुपा कर मेने कहा : हाँ, कहा नियाँ की किताब है नाईट आप से कहूँगी.ख़ुश हो कर वो चला गया. कितना भोला था ? उस की जगह दूसरा होता तो मुज़े छेड़े बैना नहीं जाता. दो दिन दरमियान मेने देखा की लोग प्रदीप की हाँसी उड़ा रहे थे. कोई कोई भौजाई कहती : देवर्जी, देवरानी ले आए हो तो उन से क्या करोगे ? उन के फ्रेंड कहते थे : भौजाई गरम हो जाय और तेरी समाज में ना आय तब मुज़े बुला लेना. एक ने तो सीधा पूछा : प्रदीप, बुर कहा ँ होती है वो पता है ? मुज़े उन लोगों की आनंदक पसंद ना आई. अब में मेरे ससुरजी के दिल का दर्द समाज सकी. मुज़े उन दोनो पैर तरस भी आया. मैने निर्धार किया की मैं बाज़ी अपने हाथ ले लूंगी और सब की ज़ुबान बंद करवा दूँगी, चाहे मुज़े जो कुछ भी करना पड़ेतीसरी नाईट सुहाग नाईट थी. मेरी उमर की दो काज़ीन ननदो ने मुझे सजाया सँवारा और शयन कमरे में छोड़ दिया. दुसरी एक ताईजी प्रदीप को ले आई और दरवाज़ा बंद कर के चली गयी में घुमटा तान कर पलंग पर बैठी थी. घुँघट हटाने के बदले प्रदीप ने नीचे झुक कर झाँखने लगा. वो कहा : देख लिया, मैने देख लिया. तुम को मैने देख लिया. चलो अब मेरी बारी, मे छुप जाता हूँ तुम मुझे ढूँढ निकालो.छोटे बच्चे की तरह वो चुपा छुपी का गेम खेलना चाहता था. मुझे लगा की मुझे ही लीड लेनी पड़ेगी. घुँघट हटा कर मेने पूछा : पहले ये बताओ की मैं तुम्हे पसंद हूँ या नहीं. प्रदीप शरमा कर कहा : बहुत पसंद हो. मुहे कहा नियाँ सुनाएगी ना ? में : ज़रूर सुना उंगी. किन्तु कुछ समय मुझ से बातें करो. प्रदीप : कौन सी कहानी सुनाएगी ? वो किताब वाली जो तुम पढ़ रही थी वो? में : हाँ, अब ये बताओ की में तुमारी कौन हूँ प्रदीप : वाह, इतना नहीं जानती हो ? तू मेरी वाइफ हो और में तेरा पतिमें : पति वाइफ आपस में मिल कर क्या करते हें ? प्रदीप : में जनता हूँ किन्तु बता उंगा नहीं. में :क्यूं ? प्रदीप : वो जो सुलेमान है ना ? Antervasnasexstories, antarvasna story, Antarvasnacom कहता है की पति वाइफ गंदा करते हें. मैने पूछा नहीं की सुलेमान कौन था, मैं कहने लगी : गंदा माइने क्या ? नाम तो कहो, में भी जानू तो प्रदीप : चोदते हें. लंबा मुँह कर के में कहने लगी : अच्छा ? बीन बोले उस ने सिर हिला कर हा कही. गंभीर मुँह से फिर मेने पूछा : किन्तु ये चोदना क्या होता है ? प्रदीप : सुलेमान ने कभी मुज़े ये नहीं बताया. शरमा ने का दिखावा कर के मेने कहा : में जानती हूँ कहूँ ? प्रदीप : हाँ, हाँ. कहो तोउस नाईट प्रदीप ने बताया की कभी कभी उस का लण्ड खड़ा होता था. कभी कभी स्वप्न दोष भी होता था. रसिकलाल सच कहते थे, उन्होंने प्रदीप का खड़ा लण्ड देखा होगा. मेने आगे बातें चलाई : ये कहो, मुझ में सब से अच्छा क्या लगता है तुम्हे ? मेरा चहेरा ? मेरे हाथ ? मेरे पाँव ? मेरे ये..? मेने उन का कोमल हाथ पकड़ कर स्तन पर रख दिया. प्रदीप : कहूँ ? तेरे गाल. में : मुझे पप्पी दोगे ?प्रदीप : क्यूं नहीं ? उस ने मेरे गाल पैर किस की. मेने उस के गाल पैर की. उनके लिए ये गेम था. मैने जैसा मुँह से मुँह लगाया की उस ने झटके से छुड़ा लिया और कहा : छी छी, ऐसा गंदा क्यूं करती हो ? में : गंदा सही, तुम्हे मीठा नहीं लगता ? प्रदीप : फिर से करो तो. मैने फिर मुँह से मुँह लगा कर किस किया.प्रदीप : अच्छा लगता है करो ना ऐसी पप्पी. मैने किस करने दिया. मैने मुँह खोल कर उस के होठ चाटे तब फिर वो ही सिलसिला दोहराया. मेने पूछा : प्यारे, पप्पी करते करते तुम को ओर कुछ होता है ? प्रदीप शरमा कर कुछ कहा नहीं. मैने पूछा : नीचे पिसब की जगह में कुछ होता है ना ? प्रदीप : तुम को कैसे पता ? में : मैं विद्यालय में पढ़ी हूँ इस लिए कहो,, उधर गुदगुदी होती है ना ? प्रदीप : किसी से कहना मतमें : नहीं कहूँगी. में तुमारी वाइफ जो हूँ प्रदीप : मेरी नुन्नी में गुदगुदी होती है और कड़ी हो जाती है में : मैं देख सकती हूँ ? प्रदीप : नहीं. अच्छे घर की लड़कियाँ लड़ाकों की नुन्नी नहीं देखा करती.मैं : में तो विद्यालय में ऐसा पढ़ी हूँ की पति वाइफ बीच कोई सीक्रेट नहीं है वाइफ पति की नुन्नी देख सकती है और उन से गेम भी सकती है पति भी अपनी वाइफ की वो वो… भोस देख डकाता है तुम ने मेरी देखनी है ? प्रदीप : पिताजी जानें गे तो बड़ी पिटाई होगी. में : श्ह्ह्हह.. कौन कहेगा उन से ? हमारी ये गुप्त बात रहेगी, कोई नहीं जान पाएगा. प्रदीप : हाँ, हाँ. कोई नहीं जान पाएगा. में : खोलो तो तुमारा पाजामा. पाजामा खोलने में मुझे सहायता करनी पड़ी. निकर उतारी तब फ़ान फ़नाता हुआ उस का सात इंच का लंबा लण्ड निकल पड़ा. में ख़ुश हो गयी मैने मुट्ठी में पकड़ लिया और कहा : जानते हो ? ये तुमारी नुन्नी नहीं है ये तो लण्ड है प्रदीप : तू बहुत गंदा बोलती हो. मैने लण्ड पर मूट मारी और पूछा : कैसा लगता है ? लण्ड ने एक दो ठुमके लगाए. वो कहा : बहुत गुदगुदी होती है मैं : मेरी भोस देखनी नहीं है ?प्रदीप : हाँ, हाँ. मेरे वास्ते शरमा ने का ये वक़्त नहीं था.मैं पलंग पर चित लेट गयी घाघरी उठाई और पेंटी उतर दी. वो मेरी न्यूड (नग्न) भोस देखता ही रह गया. कहा : में छू सकता हूँ ? मैं : क्यूं नहीं ? मेने जो तुमारा लण्ड पकड़ रक्खा हैडरते डरते उस ने भोस के बड़े होठ छुए. मेरे कहने पर चौड़े किए. भीतरी हिस्सा काम रस से गिला था. आश्चर्य से वो देखता ही रहा. मेऐन : देखा ? वो जो बुर है ना, वो इतनी गहरी होती है की सारा लण्ड भीतर समा जाय. प्रदीप : हो सकता है किन्तु चूत में लण्ड पेल ने की क्या ज़रूरत ? मैं : प्यारे, इसे ही चुदाई कहते हें. प्रदीप : ना, ना, तुम झूठ बोलती हो. मैं : में क्यूं झूठ बोलूं ? तुम तो मेरे प्यारे पति हो. मेने अभी अपनी भोस दिखाया की नहीं ?प्रदीप : में नहीं मानता. मैं : क्या नहीं मानते ? प्रदीप : वो जो तुम कहती हो ना की लण्ड चूत में डाला जाता है मुझे वो किताब याद आ गयी मैने कहा : ठहरो, में कुछ दिखाती हूँ किताब के पहले पन्ने पर रसिकलाल का नाम लिखा हुआ था. वो दिखा कर मेने कहा :ये किताब पिताजी की है पिक्चर देख वो हेरान रह गया. मेने कहा : देख लिया ना ? अब तसल्ली हुई की चुदाई में क्या होता है ? उन पैर कोई असर ना पड़ा. वो कहा : मुज़े पिसब लगी हैमें : जाइए पीसाब कर ने के बाद लण्ड पानी से धो लीजिए, वो पिसब कर आया. उस का लण्ड नर्म हो गया था. मैने लाख सहलाया, फिर से हिला नहीं. मुँह में ले कर चुस ती, किन्तु प्रदीप ने ऐसा करने ना दिया. नाईट काफ़ी बीत चुकी थी. में एक्साइट हो गयी थी किन्तु प्रदीप अनारी था. लण्ड खड़ा होने पैर भी उस के दिमाग़ में चोद ने की तमन्ना पेदा नहीं हुई थी. वो कहा : भौजाई, मुज़े नींद आ रही है उस नाईट से वो मुझे भौजाई कहने लगा. मैने उसे गोद में ले कर सुलाया तो तुरंत नींद में खो गया. मैने सोचा आगे आगे चुदाई के पाठ पढ़ा उंगी और एक दिन उस का लण्ड मेरी प्यासी फुद्दी में ले कर चुदवा उंगी ज़रूर. किन्तु मेरे नसीब में कुछ ओर लिखा था. उन के कुछ शरारती दोस्तों ने उन के दिल में ठसा दिया की चूत में दाँत होते हैं नूनी जो चूत में डाली तो बुर उसे काट लेगी, फिर वो पीसाब कहा ँ से करेगा. मेने लाख समझाया किन्तु वो नहीं माना. मैने कहा की उंगलियाँ घुसेड़ कर देख लो की भीतर दाँत है या नहीं. वो भी नहीं किया उस ने. बीन चुदवाये में कम्वारी ही रहरसिकलाल की पहचान वाले और प्रदीप के कई मुँह-बोले दोस्तों में से कितने भी ऐसे थे जिस ने मुझ पर बुरी नज़र डाली. दूर के एक छोटे देवर जी ने खुला पूछ लिया : भौजाई, प्रदीप चोद ना सके तो गभराना नहीं, मैं जो हूँ चाहे तब बुला लेना. उन सब को मैने कह दिया की प्रदीप मेरे स्मार्ट पति हें और मुझे अच्छी तरह चोद ते हें. दिन भर मैं उन सब का हिम्मत से सामना करती थी, नाईट अनारी बालम से बीन चुदवाये फूट फूट कर रो लेती थी. रसिकलाल किन्तु हुशियार थे, उन को तसल्ली हो गयी थी की प्रदीप ने मुझे चोदा नहीं था. मुझे शक है की चुपके से वो हमारे शयनकक्ष में देखा करते थे. जो कुछ भी हो, उन्हे पितामह बन ने की उतावल थी.एक दिन एकांत पा कर मुझ से पूछा : क्यूं बेटी ? सब ठीक है ना ? उन का इशारा चुदाई की ओर था जान कर मुझे शर्म आ गयी मेने सिर ज़ुक लिया, कुछ बोल ना सकी.. में रो पड़ी. मेरे कंधों पर हाथ रख कर वो बोले : मैं सब जनता हूँ तू अब भी कम्वारी हो. प्रदीप ने तुझे चोदा नहीं है सच है ना ? ससुरजी के मुँह से चोदा सुन कर मैं चोन्क़ गयी उन की बाहों से निकल गयी कुछ कहने लगी नहीं. आँसू पॉच कर सिर हिला कर हा कही.वो फिर मेरे नज़दीक आए, मेरे कंधों पर अपनी बाह रख दी और बोले : बेटी, ये राज़ हम हमारे बीच रखेंगे की प्रदीप चोद ने के काबिल नहीं है किन्तु मुज़े पोता चाहिए इस का क्या ? मेरी इतनी बड़ी जायदाद, इतना बड़ा कारोबार सब सफ़ा हो जाएगा मेरे मार ने के बाद. वो तो वो किन्तु जब मैं इस दुनिया में ना रहूं तब तेरी और प्रदीप की देख भाल कौन करेगा जब तुम दोनो बुड्ढे हो जाओगे ? मुज़े लड़का चाहिए. है कोई इलाज तेरे पास ?मैं कहने लगी : मैं क्या कर सकती हूँ पिताजी ? रसिकलाल : तुझे करना कहा ँ है ? करवाना है सम्जी ? मैं : हाँ, किन्तु किस के पास जा उन ? आप की तमन्ना है की मैं ओर कोई मर्द छी छी मुझ से ये नहीं हो सकेगा. रसिकलाल : मैं कहा ँ कहता हूँ की तू ग़ैर मर्द से चुदवाओ. ससुरजी फिर चुदवाओ बोले, मुझे शरम आ गयी सच कहूँ तो मुझे बुरा नहीं लगा, थोड़ी सी गुदगुदी हो गयी और होटों पैर मुसकान आ गयी जो मैने मुँह पर हाथ रख कर छुपा दी. मैने पूछा : आप की क्या राई है ?कुछ मिनीटों वो चुप रहे, सोच में पड़ गये बोले : कुछ ना कुछ रास्ता मिल जाएगा, मैं सोच लूंगा. मुझे तू वचन दे की तू पूरा सहकार देगी. देगी ना ? मैने वचन दे दिया. वो चले गयेउस दिन के बाद ससुरजी का वर्तन बदल गया. अब वो अच्छे कपड़े पहन ने लगे. रोज़ शेविंग कर के स्प्रे लगा ने लगे. बाल जो थोड़े से सफ़ेद हुए थे वो कलर लगवा कर काले बना दिएक दफे उन्होंने पानी का पियाला माँगा. मेने पियाला धर दिया तब लेते वक़्त उन्होंने मेरी उंगलियाँ छू ली. दुसरी बार पियाला पकड़ ने से पहले मेरी कलाई पकड़ ली. बात बात में मुज़े बाहों में ले कर दबोछ लेने लगे. मुज़े ये सब मीठा लगता था. आख़िर वो एक हट्टे कट्टे मर्द थे, भले प्रदीप जैसे जवान ना थे किन्तु मर्द तो थे ही. सासूज़ी के देहांत का एक साल हो गया था. मेरे ख़याल से उस के बाद उन्होंने कभी चुदाई नहीं की थी, किसी के साथ मेरे जैसी जवान लड़की घर में हो, एकांत मिलता हो तो उन का लण्ड खड़ा हो जाय इस में उन का क्या कसूर ?थोड़े दिन तक मेरी समझ में आया नहीं की मैं क्या करूँ. फिर सोचने लगी की क्यूं ना सहकार दूं ? ज़्यादा से ज़्यादा वो क्या करेंगे ? मुज़े चोदेन्गे ? हाय हाय सोचते ही मुझे गुदगुदी हो गयी ना ना, ऐसा नहीं करना चाहिए. क्यूं नहीं ? बच्चा पेदा होगा तो सब समस्याएँ हल हो जाएगी. किस को पता चलेगा की बच्चा किस का है ? और सच कहूँ तो मुज भी चाहिए था कोई चोदने वाला. ऐर ग़ैर को ढूंढु इन से मेरे ससुरजी क्या कम थे ? मेने तय किया की मेरे कौमार्य की भेट में अपने ससुरजी को दूँगी और उन से चुदवा कर जब बुर खुल जाय तब प्रदीप का लण्ड लेने की सोचूँगी.उस दिन से ही मैने ससुरजी से इशारे भेजना शुरू कर दिया. मैने पैडेड ब्रा पहन नी बंद कर दी. सलवार कमीज़ की जगह चोली घाघरी और ओढनी डालने लगी वो जब कलाई पकड़ लेते थे तब में शरमा कर मुस्कुराने लगी मेरा प्रतिभाव देख वो ख़ुश हुए. उन्होंने छेड़ छाड़ बढ़ाई. एक दो बार मेरे गाल पर चिकोटी काट ली उन्होंने. दुसरी बार मेरे कुले पर हाथ फिरा लिया. मैं अधिकतर ओढनी का पल्लू गिरा कर चुचियाँ दिखाती तो कभी कभी घाघरी खिसका कर जांघें दिखाती रही.दिन ब दिन सेक्स का तनाव बढ़ता चला. एक वक्त ऐसा आया की उन की नज़र पड़ ते ही मैं शरमा जा ने लगी उन के छू ने से ही मेरी पीकी गीली होने लगी उन की मोज़ूड़ागी में नीपल्स कड़ी की कड़ी रहने लगी अब वो अपना धोती में छुपा टटार लण्ड मुझ से चुराते नहीं थे. मैं इंतेज़ार करती थी की कब वो मुझ पर टूट पड़ेंगे. आख़िर वो नाईट आ ही गयी प्रदीप सो गया था. ससुरजी नाईट के बारह बजे बाहर गाँव से लौटे. मेने खाना तैयार रक्खा था . वो स्नान करने गाये और मेने खाना परोसा.वो नहा कर स्नानघर से निकले तब मैने कहा : खाना तैयार है खा लीजिए. वो बोले : तूने ख़ाया ? मैं : नही जी. आप के आने की राह देख रही थी. वो बोले : सूहास, ये खाना तो हम हररोज खाते हें. जिस की मुझे तीन साल से भूख है वो वो कब खिलाओगी ? मैं : मैं कैसे खिला उन ? कहा ँ है वो खाना ? वो : तेरे पास हैमैं समझती थी की वो क्या कह रहे थे. मुझे शर्म आने लगी नज़र नीची कर के मैने पूछा : मेरे पास ? मेरे पास तो कुछ नहीं है वो : है तेरे पास ही है दिखा उन तो खिलाओगी ? सिर हिला कर मैने हा कही. उधर मेरी पीकी गीली होने लगी मेरे दिल की धड़कन बढ़ गयीवो मेरे नज़दीक आए. मेरे हाथ अपने हाथों में लिए लिप्स से लगाए . बोले : तेरे पास ही है बता उन ? तेरी चीकनी गोरी गोरी जांघें बीच. में शरमा गयी उन से छूटने की प्रयास करने लगी किन्तु उन्होंने मेरे हाथ छोड़े नहीं बल्कि उठा कर अपनी गार्दन में डाल दिए मेने सरक कर नज़दीक गयी मेरी कमर पर हाथ रख कर उन्होंने मुज़े अपनी पास खींच लिया और बाहों में जकड़ लिया. मैने मेरा चहेरा उन के चौड़े सेने में छुपा दिया. मेरे स्तन उन के पेट साथ डब गाये उन का टटार लण्ड मेरे पेट से दब गया. मेरे सारे बदन में झुरझूरी फैल गयीएक हाथ से मेरा चहेरा उठा कर उस ने मेरे मुँह पर अपना मुँह लगाया. पहले लिप्स से होठ छू ए, बाद में दबाए, आख़िर जबान से मेरे होठ चाटे और अपने लिप्स बीच ले कर चुसे, मुझे कुछ कुछ होने लगा. ऐसी गरमी मेने कभी मेहसूस की नहीं थी. मेरे स्तन भारी हो गाये नीपल्स कड़ी हो गयी पीकी ने रस ज़राना शुरू कर दिया. मुज़ से खड़ा रहा गया नहीं.चुंबन का मेरा ये पहला एक्सपीरियंस था, मुझे बहुत मीठा लगता था. उन्होंने अपने बंद लिप्स से मेरे होठ रगडे. बाद में जबान निकाल कर होठ पर फिराई.. फिराते फिराते उन्होंने जबान की नोक से मेरे लिप्स बीच की दरार टटोली. मेरे रोएँ खड़े हो गये अपने आप मेरा मुँह खाल गया और उन की जबान मेरे मुँहमें पहुँच गयीउन की जबान मेरे मुँह में चारों ओर घूम चुकी. जब उन्होंने जबान निकाल दी तब मैने मेरी जबान से वैसा ही किया. मैने सुना था की ऐसे चुंबन को फ़्रेंच किस कहते हें.फ़्रेंच किस करते करते ही उन्होंने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और शयनकक्ष में चल दिए पलंग पर चित लिटा दिया. ओढनी का पल्लू हटा कर उन्होंने चोली में क़ैद मेरे छोटे स्तनों को थाम लिया. चोली पतले कपड़े की थी और मैने पैडेड ब्रा पहनी नहीं थी इस लिए मेरी कड़ी नीपल्स उन की चीपटी में पकड़ा गयी इतने से उन को संतोष हुआ नहीं. फटा फट वो चोली के हूक खोलने लगे. मैं चुंबन करने में इतनी मशगूल थी की कब उन्होंने चोली उतार फैंकी उस का मुझे पता ना चला. जब मेरी नीपल्स मसली गयी तब मेने जाना की मेरे स्तन नंगे थे और उन के पन्जे में क़ैद थे.स्तन सहलना कोई ससुरजी से सीखे. उंगलिओं की नोक से उन्होंने स्तन की तलेटी छुना शुरू की और होले होले शिखर पर जहाँ नीपल है वहाँ तक पहुँचे. पाँचों उंगलिओं से कड़ी नीपल पकड़ ली और मसली. ऐसे पाँच सात बार किया हर स्तन के साथ. अब पन्जा फैला कर स्तन पर रख दिया और उंगलियाँ वाल कर सारा स्तन पन्जे में दबोच्च लिया. मेरे स्तन में दर्द होने लगा किन्तु मीठा लगता था. अंत में उन्होंने एक के बाद एक नीपल और एरिओला चीपटी में ली और खींची और मसली. इन दौरान किस तो चालू ही थी.एकदम किस छोड़ कर उन्होंने अपने होठ नीपल से चिपका दिए उन के होठ लगते ही नीपल से करंट जो निकला वो क्लैटोरिस तक जा पहुँचा. वैसे ही मेरी नीपल्स सेंसीटीव थी, कभी कभी पैडेड ब्रा का स्पर्श भी सहन नहीं कर पाती थी. उस नाईट पहली बार मेरी नीपल्स ने मर्द की उंगलियाँ और लिप्स का एक्सपीरियंस किया. छोटे लड़के की नुन्नी की तरह एरिओला के साथ नीपल कड़ी हो गयी थी. एक एक करके उन्होंने दोनो नीपल्स चुसी , दोनो स्तन सहलाए और मसल डाले.उन्हों मे मुज़े धकेल कर चित लेता दिया, वो आधे मेरे बदन पैर छा गाये मेरी जाँघ के साथ उन का कड़ा लण्ड दब गया था, अपनी कमर हिला कर वो लण्ड मेरी जाँघ से घिस रहे थे. उन के हाथ स्तन पर था और मुँह मेरे मुँह को चूम रहा था. ज़्यादा देर उन से बारदस्त ना हो सकी. वो बोले, बेटी, अब में देर करूँगा तो चोदे बिना ही झाड़ जा उंगा. तू तैयार हो ?मेरी हा या ना कुछ काम के नहीं थे. मुझे भी लण्ड तो लेना ही था. मेरी सारी भोस सूज गयी टी और काम रस से गीली गीली हो गयी थी. मेने ख़ुद पाँव लंबे किए और चौड़े कर दिए वो उपर चड़ गये धोती हटा कर लण्ड निकाला और भोस पर रग़ादा. मेरे नितंब हिलने लगे. वो बोले : सूहास बेटी, ज़रा स्थिर रह जा, ऐसे हिला करोगी तो में कैसे लण्ड डालुंगा ? मैने कठिनाई से मेरे नितंब हिल ने से रोके. हाथ में लण्ड पकड़ कर उन्होंने चूत में डालना प्रारम्भ करा किन्तु लण्ड का मत्था फिसल गया और बुर का मुँह पा ना सका, पाँच सात शोर्ट ऐसे बेकार गये मेने जांघें उपर उठाई फिर भी वो बुर ढूँढ ना सके. लण्ड अब ज़रा सा नर्म होने लगा उन की उतावाल बढ़ गयीउस वक़्त मुज़े याद आया की नितंब नीचे तकिया रखने से भोस का एंगल बदलता है और बुर उपर उठ आती है उन से पूछे बिना मैने छोटा सा तकिया मेरे नितंब नीचे राझह दिया. अब की बार जब धक्का लगाया तब लण्ड का मत्था चूत के मुँह में घुस गया.मेरी बुर ने संकोचन किया. संकोचन से जैसे लण्ड दबा वैसे वो पुककर उठे : ना, ना ऐसा मत कर ऊओहह्ह्ह,आआ मेरी परवाह किए बिना उन्होंने ज़ोरों से शोर्ट मारे. मेरा योनी पटल टूटा, मुज़े जान लेवा दर्द हुआ और ख़ून निकाला और मैं रो पड़ी. उन सब से वो अनजान रहे क्यूं की उन को ओर्गेझम हो रहा था, वो अपने आप पर काबू नहीं रख सकेछूट का दर्द कम हॉवे इस से पहले लण्ड नर्म होने लगा. भोस और क्लैटोरिस में गुड़गूदी के अलावा मुझे कोई ख़ास मझा ना आया. नर्म लोडा चूत से निकाल कर वो उतरे, स्नानघर से टॉवेल ले आए और मेरी भोस साफ़ की. मेरे ख़ून से मिला हुआ उन का स्पर्म चारों ओर गिरा था वो सब उन्होंने प्यार और मोहब्बत से साफ़ किया. मुझे फिर आगोश में लिए वो लेट गये और बोले : बेटी, तेरा एहसान मैं कभी नहीं भूलूं गा. किन्तु अभी हमें ज़्यादा काम करना बाक़ी है अब जो तेरी ज़िल्ली टूटी है तब फिर से चुदाई करने में बाधा नहीं आएगी. मैं : मैं प्रदीप से चुदवाने का प्रयास कर रही हूँ हो सके तो आप उस को इतना कहिय की चोदना गंदी बात नहीं है और चूत में दाँत नहीं होते.मेरी सुनकर वो हस पड़े. उन का कोमल हाथ मेरी क्लैटोरिस से गेम रहा था और मैने उन का लोडा पकड़ा था. उगालियों की करामात से वो मुझे ओर्गेझम की ओर ले चले. मेरे नितंब डोलने लगे और भोस से भर मार काम रस फिर से ज़र ने लगा. मैने उन की कलाई पकड़ ली किन्तु वो रुके नहीं. उन्होंने एक उंगली चूत में डाली. चूत में फटाके होते थे वो उंगली से जान सके. मुझ से रहा नहीं जाता था. मेरे हाथ में पकड़ा हुआ उन का लोडा फिर तन गया था. मैने ही लण्ड खींच कर उन्हें मेरे बदन पर ले लिया. मैने लण्ड बुर पैर धर दिया तब वो बोले : बेटी, इतनी जलदी क्या है ? अभी तो तेरी बुर का घाव हरा है दर्द होगा लण्ड लेने से. मुझे उंगली से ही काम लेने दमैं किन्तु उन की सुन ने के मूड में नहीं थी. मुझे लण्ड चाहिए था, लंबा और कड़ा, उसी वक़्त, मेरी प्यासी फुद्दी में. वो मेरे बदन पर ओंधे पड़े थे, मेरे हाथ में उन का लण्ड था, मैं लण्ड चूत में डालने का प्रयास कर रही थी, वो रोक रहे थे. आख़िर मैने लण्ड मूल से पकड़ा और चूत के मुँह पर धरा. वो धक्का मारे या ना मारे मैने मेरे नितंब ऐसे उठाए की आधा लण्ड चूत में घुस गया. थोड़ा दर्द हुआ किन्तु लंबा चला नहीं. लण्ड घुस ते ही मैने योनी सिकूड कर उसे दबाता. लण्ड ने ठुमका लगाया, योनी ने फिर दबोचा, लण्ड फिर ठुमका. फिर क्या कहना था ? बाक़ी रहा आधा हिसा एक ही झटके से चूत में उतार कर वो रुके. मेरे मुँह पर चुंबन कर के पूछ ने लगे : दर्द तो नहीं होता ना ?मैने मेरे पाँव उन की कमर से लिपटाये और कहा : आप फिकर मत कीजिए. जो करना है वो कीजिए, मुझ से रहा नहीं जाता. आधा लण्ड निकाल कर छिछरे शोर्ट से वो मुझे चोद ने लगे. हर शोर्ट से योनी में से एलेक्ट्रिक करंट निकलता था और सारे बदन में फैल जाता था.मेरे नितंब ज़ोर ज़ोर से हिल ने लगे थे. आठ दस शोर्ट बाद उन्होंने फिर एक दफे पूरा लण्ड योनी की गहराई में ज़ोर से घुसेड दिया. मूल तक लण्ड चूत में उतर गया. लण्ड का मूल से मेरी क्लैटोरिस दब गयी बस इतना काफ़ी था. मैं पूरी गरम हो चुकी थी. क्लैटोरिस के दब जाने के साथ ही मुझे जोरो का ओर्गेझम हो गया. मेरी बुर ने लण्ड नीचोड़ डाला. उस ने भी स्पर्म छोड़ दिया. मेरा ओर्गेझम शांत होने तक वो रुके, बाद में उतरे. मैं थक गयी थी. करवट बदल कर सो गयअगले दिन से रसिकलाल का व्यवहार ऐसा रहा मानो की कुछ हुआ ही नहीं था. ये अच्छा था क्यूं की अडोस पड़ोस वाली चाचियाँ भाभियाँ और फुफ़्फ़ीयान सब मुझ पार कड़ी निगाहें डाल बैठी थी. मैने भी ऐसा वर्ताव रक्खा की जैसे प्रदीप मुझे रोज़ चोदता हो. उस दिन के बाद सावधानी से ससुरजी मुझे चोदते रहे. उन का बच्चा लग जाय इस से पहले मैं प्रदीप से छुड़वाना चाहती थी. एक मैने उस दिन प्रदीप की पसंदगी का खाना बनाया. नाईट जब सोए तब मैने पूछा : कैसा लगा आज का खाना ? प्रदीप : बहुत बढ़िया. रोज़ ऐसा क्यूं नहीं बनाती ? मैं : क्यूं की मैं आप से रुठ गयी हूँ प्रदीप : क्यूं ? मैं : इस लिए की आप मुझ से खेलते नहीं हें. प्रदीप : खेलूँगा. कौन सा गेम खेलना है ? मैं : राज कुमार और वन लड़की का. ख़ुश हो कर वो तालियाँ बजाने लगा और कहा :मैं राज कुमार बनूंगा. मैं : हाँ, हाँ, तुम ही हो राज कुमार. प्रदीप: आगे क्या होता है ? मैं : सुनो, पहले मैं आप को कहानी सुना उंगी. जैसे जैसे कहानी चले वैसे वैसे आप को राज कुमार का रोल अदा करना होगा. तैयार ? प्रदीप ; हाँ, तू क्या करेगी ? मैं : कहानी चलते ही आप समझ जाएँगे हुशियर हें ना आप ? मैने कहानी शुरू की …… एक था राजा का बेटा, बिल्कुल आप जैसा. जवान भी था आप जैसा. पता है कैसे पता हुआ की वो जवान हो गया था ? प्रदीप : ना, कैसे पता हुआ ? मैं : उस का बदन भर गया. सीना चौड़ा हो गया. चहेरे पैर दाढ़ी मुछ निकल आए सब तुमारी तरह, हे ना ? प्रदीप : और क्या ? मैने शरमा के निगाहें झुका दी और कहने लगी : और उस का वो …. वो जो है ना दो पाँव बीच, लंबा सा, क्या बोलते हें उसे ? प्रदीप : मूत की जगह ? मैं : हाँ, हाँ, वो ही. किन्तु उस का दूसरा नाम भी है प्रदीप : है किन्तु गंदा नाम है मैं : ऐसा ? सुनाओ तो मुझे. मुज़े सुनना है प्रदीप : ना, तू महिला है ऐसे लफ्ज़ नहीं सुनती और बोलती. मैं : तो कहानी ख़तम. मैं फिर आप से रुठ जा उंगी. मैने रुठ ने का और रोने का गेम खेला. वो पिघल गया और कहा : रो मत. किसी को कहना मत. उस को लोडा कहते हें. मैं : हाय हाय, तो वो लॅन ……लॅन …. लण्ड किसे कहते हें ? प्रदीप : पता नहीं. छोड़ो ना ये बेकार बातें. कहानी सुनाओ ना. मैं : हाँ , तो वो राज कुमार का लोडा लंबा और मोटा हो गया था जिस से पता चला की वो जवान हो गया था. तुमारा ……. लो …लो…..लोडा भी मोटा हो गया है ना ? प्रदीप : हाँ , कभी कभी कड़ा भी हो जाता है . मैं : अरे वाह, राज कुमार को भी ऐसा ही होता था. उस का वो भी कड़ा हो जाता था. प्रदीप : फिर क्या हुआ ? मैं : एक दिन राज कुमार शिकार खेलने जंगल में गया. अपने रसाले से छूट कर वो बहुत दूर चला गया और रास्ता भूल गया. घूमते घूमते वो थक गया और उसे भूख भी लगी प्रदीप : फिर ? मैं : इतने में उस ने एक सरोवर देखा. वहाँ जा कर उस ने देखा की एक लड़की पानी में नहा रही थी. लड़की ने राज कुमार को देखा नहीं था. राज कुमार एक पेड़ के पीछे छुप कर लड़की को देखने लगा. लड़की न्यूड (नग्न) नहाती थी. जब वो खड़ी हुई तब राज कुमार उस के नंगे बदन को देख कर उत्तेजित हो गया. जानते हो क्यूं ? प्रदीप : क्यूं ? मैं : क्यूं की उस लड़की के सीने पर बड़े बड़े गोल गोल कठोर स्तन थे, बिल्कुल मेरे हें वैसे. और भारी चिक्नी जांघें बीच काले झांट से ढकी छोटी सी भोस थी. प्रदीप : तू तो गंदा बोलती हो. तेरी भ … भ .. .भोस भी ऐसी है ? मैं : मुझे क्या पता ? तुम ही देख कर तय कर लो ना. प्रदीप : तुझे बुरा नहीं लगेगा ? मैं : बिल्कुल नहीं, तुम जो मेरे स्मार्ट पति हो. किन्तु ज़रा ठहर जाई ये. कहानी पूरी होने पर देख लेना . प्रदीप : हाँ, ऐसा ही करेंगे. मैं : वो लड़की को देख कर राज कुमार का लो … लोडा तन गया, वो अपना थाक और भूख भूल गया. लड़की अपने कपड़े पहन ले उस से पहले राज कुमार बाहर निकल आया. उसे देख कर लड़की गभरा गयी अपने हाथों से स्तन और भोस ढकने लगी राज कुमार ने अपनी पहचान दी और कहा की वो रास्ता भूल गया था इसी लिए वहाँ आ पहुँचा था.लड़की ने बताया की वो नज़दीक वाले आश्रम की लड़की थी और नहाने आई थी. उस ने कहा की वो राज कुमार को आश्रम में ले जाएगी और खाना खिलाएगी. उस वक़्त राज कुमार का लण्ड खड़ा था और ठुमके लगा रहा था. उस ने धोती का तंबू बना रक्खा था. लड़की ने पूछा : ये क्या है ? राज कुमार : ये मेरा सेवक है लड़की : वो ऐसे क्यूं हिल रहा है ? धोती से निकल कर दिखाओ ज़रा. राज कुमार ने धोती हटा कर लण्ड बाहर निकाला और कहा : पता नहीं. अधिकतर ऐसा करता है लड़की हुशियर थी वो सब जानती थी. उस ने काई प्राणीओ को चोदते देखा था.उस की सहेलियों ने उसे सिखाया था की चुदाई कैसे और क्यूं की जाती है उस ने कहा : राज कुमार, में जानती हूँ की आप का सेवक क्यूं ऐसा हिल रहा है वो गरम हो गया है और ठंडी जगह में जाना चाहता है राज कुमार भी चुदाई के बारे में कुछ जानता था, जैसे तुम जानते हो. जानते हो ना ? प्रदीप : जानता हूँ आगे बोलो. फिर क्या हुआ ? मैं : फिर वो लड़की ने राज कुमार के पास आ कर गले में बाहें डाल दी. ऐसे ….. मैने मेरी बाहें प्रदीप के गले में डाल दी. में : लड़की के हाथ उपर उठे तब उस के स्तन खुले हो गये और राज कुनार के सीने से दब गये ऐसे …… राज कुमार ने मुँह से मुँह लगा कर चुंबन किया …..ऐसे …… और एक हाथ से स्तन थाम लिया. लड़की ने राज कुमार का लण्ड पकड़ लिया.इस वक़्त मैने प्रदीप का लण्ड पकड़ा नहीं. मेरा स्तन उस की हथेली में था. वो कहा : कैसे पकड़ लिया लण्ड ? ऐसे ….. कह कर मैने लण्ड पकड़ा. मैने कहा : लड़की तो न्यूड (नग्न) थी, मैने तो कपड़े पहने हें. मेरे राज कुमार, तुम कहो तो मैं भी कपड़े निकाल दूं ? प्रदीप : हाँ,, हाँ, निकाल दो. मैने फटा फट कपड़े उतार दिए मेरे स्तन देख कर वो कहा : इतने बड़े ? मैं : हाँ, तुमारे लिए ही है प्रदीप : में चुस सकता हूँ ? में : क्यूं नहीं ? प्रदीप ने मेरी नीपल मुँह मे ली और चूसने लगा. मैने उस के हाथ मेरी कमर पर लिपटाये. एक हाथ में लण्ड पकड़ कर मैं मूठ मार ने लगी प्रदीप रितारडेड हो या ना हो, उस का लण्ड रितारडेड नहीं था. सात इंच लंबा और ढाई इंच मोटा था. लोहे जैसी कठोर दांडी पर मख़मल जैसी कोमल चमड़ी थी जो आसानी से उपर नीचे खिसकाई जा सकती थी. लण्ड का मत्था भारी और चिकना था. उस वक़्त उत्तेजना से मत्था जाँवली कलर का हो गया था और भर मार काम रस बहा रहा था.प्रदीप के होठ मेरी नीपल पर लगते ही मेरी एक्सात्मेंट बढ़ गयी मेरी भोस भारी हो गयी और पानी बहाने लगी क्लैटोरिस कड़ी हो कर ठुमके लगाने लगी योनी में लाप्प लाप्प होने लगा. मैं होले से से पलंग पर लेट गयी और प्रदीप को मेरे उपर ले लिया. मैं : प्यारे, एक बात कहूँ ? राज कुमार ने लड़की के साथ ऐसा ही किया था जो अभी तुम मेरे साथ कर रहे हो. आनंद आता है ना नीपल छोड़े बिना उन ….उन कर के उस ने हा कही. कहानी कहानी के ठिकाने पर रह गयी मैने मेरी जाँघें चौड़ी कर दी. वो बीच में आ गया. तना हुआ लण्ड मेरे हाथ में ही था. मैने लण्ड का मत्था चूत के मुँह पर टीका दिया. प्रदीप ने दो पाँच शोर्ट लगाए किन्तु लण्ड फिसल गया, चूत में घुस पाया नहीं. प्रदीप अपना विचार बदल दे इस से पहले मैने कहा : राज कुमार का लण्ड लड़की की चूत में जा ना सका क्यूं की लण्ड मोटा था और बुर सीकुडी थी. लड़की ने राज कुमार को बाहों में भर लिया …..ऐसे …..और पलट गयी अब राज कुमार नीचे और लड़की उपर हो गये ….ऐसे. प्रदीप मेरा एक स्तन पकड़े हुए नीपल चुसे जा रहा था इस लिए मैं बैठ ना सकी. दो बदन बीच हाथ घुसेड़ कर मैने लण्ड पकड़ा और उस पर बुर टिकाई. मैने कमर का हलका धक्का मारा तो लण्ड चूत में घुस गया. मैने अपने नितंब हिला कर प्रदीप को चोदना शुरू कर दिया.मैने कहानी आगे चलाई : लड़की अपने कुले हिला कर राज कुमार का लण्ड बुर मे भीतर बाहर करने लगी लण्ड की टोपी खिसक गयी और नंगा मत्था चूत से घिस ने लगा. दोनो को बहुत मझा आने लगा. तुम्हे भी मझा आ रहा है ना ? इस वक़्त प्रदीप ने जो किया उस से मैं दंग रह गयी उस ने स्तन छोड़ दिया, मुझे बाहों में भर ली और पलट कर उपर आ गया, चूत से लण्ड निकाले बिना. नीचे आते ही मैने जांघें चौड़ी कर दी और पाँव इतने उठाए की मेरे घुटने मेरे कानों से लग गये नितंब का एंगल बदलने से अब पूरा लण्ड चूत में उतर गया. मेने कहा : वाह मेरे राज कुमार, वो राज कुमार ने भी ऐसा ही किया था. प्रदीप किन्तु कुछ सुन ने के होश में नहीं था. घचा घच्छ, घचा घच्छ शोर्ट से वो चोदने लगा और दो तीन मिनिट की चुदाई में झड़ गया. मुज़े ओर्गेझम हुआ नहीं लकिन इस की मुज़े परवाह नहीं थी. जब वो होश में आया तब कहा : ये क्या हुआ था ? मैं : पहले ये बताओ की तुम्हें मझा आया की नहीं. प्रदीप : आया, ख़ूब मझा आया. मैं : मझा आया तो किसी से बोल ना नहीं. जो तुमने अभी किया वो हैर पति अपनी वाइफ के साथ करता है उसे चुदाई कहते हेंप्रदीप : मैने तुम को चोदा ? मैं : हाँ, मेरे प्यारे, तुम ने मुझे अपने लंबे लण्ड से चोदा जैसे राज कुमार ने वन लड़की को चोदा था. प्रदीप : तेरी चूत में दाँत तो नैन है मैं : किसी की चूत में दाँत नहीं होते. किसी ने तुम्हे ग़लत ठसा दिया था. प्रदीप : मैं तुझे रोज़ चोद सकूंगा ? मैं : ज़रूर, जब चाहे तब चोद सकते हो. प्रदीप : अभी भी ? मैं : क्यूं नहीं ? पता है ? उस राज कुमार का लण्ड लड़की ने पकड़ रक्खा था. देखते देखते में लण्ड फिर से टन गया. राज कुमार ने लड़की को आधी बिता दी जिस से वो अपनी चूत में आता जाता लण्ड देख सके. छूट और लण्ड गिले ही थे. स र र र र करता लण्ड फिर से बुर की गहराई नापने भीतर उतर गया. दोनो ने लण्ड की लगजरी कारवाई देखी और बीस मिनिट तक घमासान चुदाई की. प्रदीप ने भी मुज़े दुसरी बार चोदा. इस वक़्त मुझे छोटा सा ओर्गेझम हुआ. चूत से लण्ड निकले इस से पहले प्रदीप नींद में खो गया. उस को उतार कर बिस्तर पर सुला दिया और मैं सफ़ाई के लिए स्नानघर में चली गयीजब मैं निकली तब मेरी उत्तेजना बनी रही थी. औरत को कैसे संतुष्ट करना वो प्रदीप कैसे जाने ? मेरी भोस गीली थी और क्लैटोरिस टटार थी. मैं हस्त मैथुन सोच रही थी की रसोईघर से आवाज़ आई. मैं रसोईघर में गयी देखा तो ससुरजी पानी पी रहे थे. पास जा कर मैने कहा : पान क्यूं पी रहें हें आप ? दूध पी लीजिए ना. मेरी आँखों की शरारत वो समझ गये मुज़े बाहों में भर लिया और किस करने लगे. बोले : मैने तुमारी चुदाई पूरी देख ली है तू बड़ी हुशियार हो. कहानी के बहाने तू ने प्रदीप का लण्ड ले ही लिया. बातें करने के मूड में मैं नहीं थी, मुझे तगड़ा लण्ड चाहिए था. उन का लण्ड हाज़िर ही था, मैने जल्दी से पकड़ लिया और कहा : हमारी चुदाई देख आप को कुछ नहीं हुआ ? वो बोले : क्यूं ना हो ? अब तक मेरा फौलादी लण्ड खड़ा था, बड़ी कठिनाई से ठंडा पानी घुसेड़ कर मैने उसे शांत किया था. अब तू आ गयी अब वो मेरा कहा नहीं मानेगामैं : ना माने तो क्या बुरा है ? मेरी बुर भी अभी संतुष्ट नहीं हुई है चलिए ना. ससुरजी मुझे अपनी शयनकक्ष में ले गये मैं पलंग पर लेट गयी उन्होंने मुझे चार पाँव किया और बोले : आज पीछे से करेंगे. मैने सोचा की वो चूतड़ मारना चाहते थे. मैने कभी चूतड़ मरवाई नहीं थी. इस लिए डर से मैं कहने लगी : मुझे चूतड़ नहीं मरवानी. मेरी प्यासी फुद्दी में आग लगी है उसे अपने पानी से शांत कीजिए. वो हस पड़े. बोले : अरी पगली, तूने वो किताब नहीं देखी जो मैने तुझे दी थी ? मैं चूतड़ मारने नहीं जा रहा हूँ पीछे से लण्ड घुसेड़ कर चोदुन्गा. तेरी सासूज़ी के साथ मैने किताब वाले सब आसनों ट्राय कर लिए हें. वो भी क्या दिन थे ? चुदाई ही चुदाई, नाईट दिन जब देखो तब लण्ड चूत में घुसा ही देखो. वो मेरे नितंब सहला रहे थे और चौड़े कर रहे थे. उन की उंगलियाँ बुर का मुँह तक पहॉंच गयी थी. मैने कहा : किताब तो मैने ठीक से देखी है इन में से आप को कौन सा आसान ज़्यादा पसंद आया है ? वो : वही जिस में घोड़े श्वान की तरह चोदा जाता है दो उंगलियाँ छूट में दल कर भीतर बाहर कर रहे थे वो. मैं : क्यूंवो : इस में लण्ड मूल तक चूत में घुस पाता है थोड़ा भी बाहर रहता नहीं है दूसरे, हर शोर्ट के साथ क्लैटोरिस लण्ड से घिसी जाती है दोनो हाथों से स्तन पकड़े जाते हें.. भोस और क्लैटोरिस को सहालाना आसान होता है अभी मैं तुम्हे दिखा उंगा. उन्होंने पीछे से लण्ड चूत में डाला. स र र र र र करता पूरा लण्ड मूल तक भीतर उतर गया. जब ंन्हों ने थोड़ा निकाला और डाला तब पता चला की लण्ड कैसे क्लैटोरिस से घिस पाता था. फिर से लण्ड बुर की गहराई में दबाए रख कर वो रुके. मैं कब की उत्तेजित हुई थी. मेरी योनी में फटाके होने लगे. जैसे उन की उंगलियों ने क्लैटोरिस छुआ, मुझे ज़ोर से ओर्गेझम हो गया. ओर्गेझम की लहरें शांत हुई तब वो मुझे चोद ने लगे. मैने सोचा था की वो दो पाँच मिनिट में झड़ जाएँगे किन्तु ऐसा हुआ नहीं. लंबे, गहरे और धीरे शोर्ट से उन्होंने मुझे दस मिनिट तक चोदा. आख़िर मुझे पलंग पर सपाट लेटा कर तेज़ रफ़्तार से चोद ने लगे और झडे. इन दौरान मैं तीन बार झड़ी.कुछ समय हम पड़े रहे. उन्होंने लाख किस कर दी. नर्म लोडा निकाल कर वो स्नानघर में चले गये जब वो निकले तब में सो गयी थी. उस नाईट के बाद प्रदीप अधिकतर मुझे चोदा चादी करता रहा. ओर्गेझम के लिए किन्तु मुझे ससुर जी का सहारा लेना पड़ा. मुझे ये मंज़ूर था क्यूं की इस से हम तीनो राज़ी थे. ससुर जी ने मुझे कई पाठ पढ़ाए. किताब वाले सब आसनों कर दिखाए. दर्द बिना कैसे लण्ड गांड में लिया जाता है वो दिखाया. लण्ड चूसने की तकनीक सिखाई. मुठ मार कर झडे बिना कैसे लण्ड को ओर्गेझम तक लिए जा सकता है वो सिखाया. वक़्त के साथ प्रदीप की दिल चश्पी भी बढ़ती चली चुदाई में. पाँच महीनो बाद मैने गर्भ रख लिया और पूरे महीनों बाद अल मस्त लड़के को जन्म दिया. मुझे पता नहीं है की उस का बाप कौन है प्रदीप या ससुरजी. डिलिवरी के बाद थोड़े दिवासों तक मैं ये सोचती रही. बाद में बच्चे की देख भाल में ऐसी लग गयी की दुसरी बातें सोच ही ना सकी.अलबत, बाप और बेटे दोनो से मेरी चुदाई चालू रही है जब मेरा राज दुलारा बेटा चौदह साल का होगा तब मैं छत्तीस साल की हूँगी. हो सकता है उस की पहली खतरनाक और धमाकेदार चुदाई मुझ से हो. अभी तो मैं उस की नुन्नी से खेलती हूँ कभी कभी मुँह में लिए चुस भी लेती हूँ आप राय दीजिए, क्या करना चाहिए नुज़े ? चुदाई चालू रक्खूं या ससुरजी से ना बोल दूं ? ना बोलूं तो कैसे बोलूं ? पिछली उमर में उन के लिए आनंद का एक मात्र साधन है मेरी भोसड़ी. और मुज़े भी ओर्गेझम चाहिए जो प्रदीप मुझे नहीं दे सकता है क्या करूँ ? 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